Hindi Poetry

अँधेरी रात में

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अँधेरी रात में

ये शीतल हवाएँ,
घनघोर घटाये,
और फ़िजाएँ,
आकर कहती है
हम साथ हैं तुम्हारे,तुम सोना नहीं।

बन्द करना चाहे आँखे
कर लेना आराम
मगर इससे पहले,
ख़त्म कर लो सब काम,
मैं हुँ तुम्हारे पास,मुझे खोना नहीं,
मैं वक्त हुँ तुम्हारा,तुम सोना नहीं।

तुम्हारे साथ रो लूँगा
बिन तुम्हारे न हसूँगा
मिला कर तुमसे आँखे
हमेशा सच ही कहूँगा,
करूँगा मार्गदर्शन,तुम्हें छोड़ना नहीं
मैं आइना हुँ तुम्हारा,तुम सोना नहीं।

©उज्ज्वल शुक्ला

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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