आईना

आईना

आईना

तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं
तेरी सांसे न कर सकी वफ़ा, जिनसे मैंने कुछ भी छिपाया नहीं
हां तेरी यादें हुई वो आइना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं
यादों का असर कुछ ऐसा हुआ, मैंने खुद को कभी खुद में पाया नहीं।
तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं ।

मेरे मन में समाया, मेरे दिल में समाया, नस-नस में समाया सा रहता है तू ,
कुछ तुमने कहा कुछ हमने सुना, हर पल बस सच सा ही कहता है तू ,
हां तू है वही जिसने बदली मेरी मंज़िल, मगर रस्ता है वही,
अब ना है मुझे कुछ तेरी ख़बर, और है तेरा कोई साया नहीं,
तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं ।

जिस तरह से जुड़ा था यह तुझसे मेरा दिल , मैंने कभी ना सच को है जाना,
ना चाहत बची थी झुका था ज़माना, बस सपना था एक मुझे तुझमें समाना,
अब आया ये ज़िगर, तुझपे ओ हमसफ़र, कहीं और मुझे अब तो जाना नहीं,
मुझे तो बदला है तूने बेखबर, पर खुद को बदल तू पाया नहीं,
तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं ।।

Naman Jain
@ naman9203

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