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आत्मसम्मान

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शायद
तुम कुछ खोते जा रहे हो…

वही जिसके दम पर जीने मरने
की बात करते नहीं थकते,
वही जिसे तुम कहते थे ये तुम्हारे
व्यक्तित्व का आभूषण है,

आज कहाँ चला गया?
जो…
इतने विचलित घूमें जा रहे हो…..,
जब इश्क़ किया था,
तो उसे आसानी से हार कर आगए….

लगता है तुम्हें इस खेल के दिशानिर्देशों का इल्म नहीं है,
जो सबसे प्रिय को हारने के
बाद भी…उसे जीतने की उम्मीद में खुद को घुमा रहे हो

हाँ यह वही आत्मसम्मान है,
जिसे तुम खोते जा रहे हो…
जिसे तुम खोते जा रहे हो……..
©अनन्त_विश्व
विश्वजीत सिंह राठौड़

काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो…..

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About Post Author

Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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