Blog

“आदर्श मानव “

0 0
Read Time:2 Minute, 4 Second

एक जीव मात्र जीवजगत के समस्त जीवों 

को जीना सिखा रहा है ।

खुद को सर्वोपरि और इस सृष्टि 

का सर्वेसर्वा समझने वाला ,

या फिर यूं कहूँ कि

खुद की जान के आगे दूसरों की परवाह न करने वाला जीव ‘मानव’

अब अपने  अस्तित्व के मूल में प्रविष्ट कर रहा है ।

और यह सब भय के कारण संभव हो पाया है 

तो यह भय सही है ।

अपने फायदे के  लिए न जाने कितने ही जीवों को अनायास ही मौत के घाट उतारने में तनिक भी संकोच नहीं  करता ।

आज वो खुद खतरे में है तो बिलख क्यों पड़ा?

शायद अब हो पायेगा उसे अहसास अपनों सेऔर अपनों के बिछड़ जाने का, क्षण भर में जीवन खत्म हो जाने का ,बेमौत मारे जाने का ।

और महसूस कर पायेगा वो बेजुबान जानवरों का दर्द ।

सच्चे अर्थों में यह जीव  मानव को उसके अस्तित्व का प्रयोजन समझाने आया है 

कि उसका विवेक नेक कर्मों और उसका चातुर्य सृष्टि कल्याण में सहायक हो सकने वाले कर्मों को अंजाम तक पहुँचाने के लिए दिया गया है न कि 

किसी दूसरे जीव को सताने के लिए ।

इस भय से मानव अपने मूल्यों सहित कर्तव्य पालन ,

धर्म की परकाष्ठाओं का अनुपालन कर रहा है 

और साथ ही अपने परिवार को समय दे रहा है ।

कुछ देवमानुष जिन्हें अपने मानव होने पर घमंड नहीं है 

ऐसी विपदा की घडी में अपनी जान जोखिम में डालकर सभी की मदद कर रहे है ,असल में ऐसे लोगो का मानव जीवन सार्थक है ।

उन्हें खुद पर फक्र होना चाहिए की वे इस संसार के आदर्श मानव है ।

written by :- sapan agrawal

About Post Author

sapan_agrawal

graduate in bio_science from university maharaja's college.jaipur now pursuing teachers training course . कुछ ख्वाहिशें मेरी, बर्फ के मकान सी। जैसे मस्जिद में गीता, मंदिर में कुर-आन सी ।
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Author

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

%d bloggers like this: