इतने सवाल क्यूं है 

इतने सवाल क्यूं है 

हर शख़्स इतना
कमज़ोर क्यूं है

जीवन जब वरदान है फिर 

झुल फंदें में

खुद के हत्या का अपराधी खुद ही क्यूं है

मोहबत के इस जहां में

झुलसे  नफरत में हर शख़्स  क्यूं है

जलाते जब हर वर्ष रावण धूमधाम से 

फिर इतने हैवान क्यूं है 

लबों पे मर्यादा पुरुषोत्तम राम राम 

फिर होता इतना नारी का शोषण क्यूं

पढ़ते  पवित्र क़ुरान, गीता ,रामायण बाइबल

फिर मजहब के लिए लहूलुहान क्यूं है

मिट्टी में ही मिलना है एक दिन सब को

फिर इतने अहंकार क्यूं है?

क्यूं है

कुणाल कंठ 

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@kunal_ki_kavita214

 

Entry No. THG021

Date 29-10-2020

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