एक तस्वीर

एक चित्रकार तो नहीं पर तस्वीर बना रहा हूँ मैं,
एक खाली पन्ने को रंगों से सजा रहा हूँ मैं,
एक सितार जिसके तारों पर धूल जम गयी एक अरसे से,
आज बन्द कमरे से निकाल कर उसे बजा रहा हूँ मैं।।

ज़ुल्फों की गहराइयाँ शायद होंगीं घने बादल जैसी,
पता नहीं कब बरसेंगी प्यास है मेरी भी पपीहे जैसी,
चेहरे की चमक ऐसी जैसे हो एक पूनम का चाँद,
चांदनी के रास्ते से पहुँचूँ ,सभी सीमाओं को फाँद,

आँखों उसकी प्यार का सागर हैं तो,
मैं उसमें तैरना चाहता हूँ मछली की तरह,
काजल उसका घोर अंधेरी रात है तो,
मैं उसमें चमकना चाहता हूँ जुगनूं की तरह,

गालों के सपाट सरल रास्ते कभी बहक जाते हैं,
जब लबों पे उसके एक मुस्कान आती है,
उनमें बने हुए गड्ढे देख लेता हूँ कभी,
तब मेरे जान में जान आती है।

एक गुलाब देखा था मैंने बगीचे में,
सुकून से खिलते हुए मुस्कुराते हुए ,
होंठ उसके उन्हीं पंखुड़ियों जैसे है नाज़ुक,
उसी जैसे हँसते हुए शर्माते हुए,

मोतियों की माला की तरह सफेद,
बिना किसी धब्बे के, दूध की तरह साफ,
उसके दाँत मुस्कराहट बिखेरते है,
जैसे खिल उठा नीले आसमां में आफ़ताब,

सहर में कोयल जब बोलती है,
तो उसकी तस्वीर उभर के आती है मेरी आंखों में,
ठंडी हवा चलती है तो लगता है मानो,
डूब रहा हूँ मैं उसकी सोख साँसों में,

अब तो बस इंतज़ार है इस ख़्वाब के संवरने का,
सागर के किनारे शीपों की तरह बिखरने का,
एक बार मुझे वो अपनी मुहब्बत से तराशे तो सही,
मुझे बहुत इंतज़ार है कोहिनूर की तरह निखरने का।।

मोहित की कलम से✍✍

नींदिया परी

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