Blog

एक वक़्त ऐसा भी…

0 0
Read Time:1 Minute, 12 Second
elephant_thehindiguruji
Image Source: Google

युद्ध का बिगुल बज चुका है
अकल्पनीय मगर सत्य
सारी मानव जाति अपने बनाए
पिंजरे में है क़ैद बेबस
कभी सोचा न था
वक़्त का पहिया ऐसे धमेगा
हाँ कभी चाहा था
काश एक दिन के लिए ही सही
वक़्त ठहर जाए
ज़िंदगी की आपाधापी से सभी मुक्त हो
सारी दौड़ समाप्त हो
हर दिन एक जैसा हो
मगर इतना ना सोचा था
ये युद्ध प्रकृति का है
मानव के विरुद्ध
धरती-माँ ने किए है सारे मार्ग अवरुद्ध
आज बादल दिखने लगे है
पेड़-पोधे भी नाच-गा रहे है
पशु-पक्षी है हैरान
क्यूँ है ये इंसान परेशान
मानव ने सोचा था
अवतार पर एकधिकार क्या सिर्फ़ उसका है
नहीं, यहाँ सब को हक़ है बराबर
हे इंसान तू सुधर जा
अन्यथा कुछ भी हो सकता है
विकास की ये अंधी दौड़ तेरी
तुझे ही ले डूबेगी।

Written By: CA Sunita Agrawal

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
%d bloggers like this: