Hindi Poetry

एक वादा ऐसा भी

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एक वादा ऐसा भी

रोना मुनासिब न था,
मातृभूमि का बुलावा आया था।

एक माँ ने अपने बेटे को गले लगाकर,
विजय भव: का आशीर्वाद दिया था।

एक नई शौर्यगाथा लिखने चल पड़ा था वो,
अपनी माँ से मातृभूमि के लिए एक वादा करके जा रहा था जो वो।

कह गया लौटूंगा ज़रूर,
चाहे लौटु जिंदा या लौटु शहीद होकर।

जंग खत्म हुआ और जीत की खबर सुनीं,
मां अपने बेटे का इंतजार कर रहीं थीं।

लौटा बेटा अमर होकर,
आया शहीद तिरंगे में लिपटकर।

मां का सीना गर्व से चोड़ा हुआ,
फिर बेटे के जाने के ग़म से चकनाचूर हुआ।

बेटा तो चला गया,
अब मां भी जीकर क्या करतीं।

उसने भी वहीं अपने प्राण त्याग दिए,
अपने मातृत्व का वादा निभातें हुए वह भी अपने बेटे संग अंतिम यात्रा पर जाने को‌ सज्ज हुई।

रोता‌ रह गया ज़माना,
देखता‌ रह गया ज़माना।

वाह वाही करता रह गया ज़माना,
एक मां और बेटे के वादें पूर्ण होने का दृश्य एकटक देखता रह गया ज़माना।

©️दीपशिखा अग्रवाल!

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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