ऐसा परिवार अब कहाँ

ऐसा परिवार अब कहाँ

ऐसा परिवार अब कहाँ

वो भी क्या ज़माना था।
एंटीना चारों तरफ घुमाना था।
छत पे चढ़कर, बाबा चिल्लाते थे
ठीक हुआ या नही, दोहराते थे
हम भी चिल्ला – चिल्ला कर
हाँ या नही बताते थे।
महाभारत, श्रीकृष्ण और चित्रहार
था एक टिवी पर लगता था देख रहा पूरा संसार
दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची या मामा-मामी
देखते थे सब एक साथ रंगोली या मोगली

वक़्त क्या ऐसा बदला बदल गयी सब तस्वीर
फ़िज़ा बदली घर बदला बदल गयी तक़दीर
रिमोट के झगड़े भाई-बहन के बीच सिमट गई
वक़्त के हाथों, फूल सारे एक गमले में लिपट गयी
हम-तुम और टीवी ही घर में रह गए
जो थे रिश्ते सारे वो कहीं बह गए

जो दिल चाहिए हर पल सब टीवी पे मिल जाता है
जो मज़ा पहले आता था, अब कहाँ आता है
जो मज़ा पहले आता था, अब कहाँ आता है

ऐसा परिवार अब कहाँ

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

कुटुम्बकाल का चक्रव्यूहघर की चौखटNews

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