करें क्या

करें क्या ???

करें क्या ???
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ऐ वक़्त तू बता, आखिर करें क्या?
डरने लगी है ज़िन्दगी, तो डरे क्या?

कुछ काँच के टुकड़े, चुभे हैं पाऊं में
सहारा बैसाखी का लेकर, बढ़ें क्या?

तूफान भी अक्सर , टकराने लगी है।
हौंसलों की उम्मीद के साथ, अड़े क्या?

पर्वत ऊंचा है, तो ऊंचा ही सही।
कमर में बांन्ध कर रस्सी, चल चढ़ें क्या?

मिटा दे हस्ती, इतना आसान नही नीलोफ़र
गद्दार खड़ा है सामने, तो चल लड़ें क्या?

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

किन्नर

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