कर्म को तू धीर कर

कर्म को तू धीर कर

कर्म देख रहें हैं तुझे- तू सब पापों का नाश कर,
कर अपने हाथों पर यकीन- इन्का अब तू विश्वास कर,,,,,,

ना रुक तू- ना झुक तू- ना हो कहीं पर बेसबर,
वो देख रहा है- वो जान रहा है- जिसको है सबकी खबर,,,,,
‘कर्म का तू ध्यान कर- कर्म को तू
मान कर,
कर्म को तू धीर करके- खुद को
कर्मवीर कर।’

शस्त्र हो या अस्त्र हो- या कोई मायावी वस्त्र हो,
खुद पर तू कर यकीन- तलाश कर खुद की ज़मीन,
वक़्तको तू थाम ले- अपने रक्त को उबाल दे,
‘कर्म का तू ध्यान कर- कर्म को तू
मान कर,
कर्म को तू धीर करके- खुद को
कर्मवीर कर।’

नारी को तू मान दे- वीर का तू सम्मान कर,
धरती पे खुद्को वार के- अपने संस्कारों को तू धनवान कर,
राम राज्य हो या कृष्ण चरित्र ये फ़िरसे तू लाएगा- बच्चा बच्चा भी फ़िर वीर केहलाएगा,,,,,,,
‘कर्म का तू ध्यान कर- कर्म को तू
मान कर,
कर्म को तू धीर करके- खुद को
कर्मवीर कर।’

तू विचार कर- ना विराम कर
शत्रुओं का काल बनके उनका तू संहार कर,
देश हो-समाज हो या किसी निर्दोष की आवाज़ हो,
इन सबके तू काम कर- तू निष्काम रूप से काम कर,,,,,
‘कर्म का तू ध्यान कर- कर्म को तू
मान कर,
कर्म को तू धीर करके- खुद को
कर्मवीर कर।’

खुद पे ना संदेह कर- खुद को तू अजेय कर,
कर नाम रोशन सबका और भारत माता की विजय कर,,,,
‘कर्म का तू ध्यान कर- कर्म को तू
मान कर,
कर्म को तू धीर करके- खुद को
कर्मवीर कर।’

✍kabiryashhh✍

 

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