कर्म

हाथों की लकीरों पर यकीं नहीं मुझे,
मैं वो कर्म करके दिखाउंगा।
कहते हो फल नसीबों से मिलते हैं,
मैं वो कर्म करके पाऊंगा।।
अग्यार अख्ज़ बैठे हैं बहुत,
अन्जुमन में अब्तर करने को।
अस्ल मेरी भी अर्श है,
मैं भी आफ़ताब सा चमक कर दिखाउंगा।
कहते हो फल नसीबों से मिलते हैं,
मैं वो कर्म करके पाऊंगा।।

©Yogesh Sharma

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