काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो…..

तू सामने बैठी हो मेरे,
ओर हाथो में एक-दूसरे का हाथ हो,
काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो……

तेरी नजरो से नजरे मिलाऊँ मैं,
फिर तुझसे तुझ को ही चुराऊ मैं,
होठो से कुछ न बोले हम, सिर्फ आंखों आंखों से बात हो,
काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो…..

तेरी बिखरी सी जुल्फों को अपने हाथों से संवरू मैं,
आंखों में भरकर तुझको फिर अपने दिल में उतारू मैं,
के बरसता ये अम्बर ओर फिर झूमती ये पूरी कायनात हो,
काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो,

जीत कर तेरे होठो की हंसी अपना सब कुछ तुझ पर हारू मैं,
बैठकर तेरे सामने तुझे पूरी रात निहारु मैं,
रुक जाए समय वही पर ओर फिर खत्म न वो रात हो,
काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो……

बांहो में भरकर तुझको फिर अपना बना लू मैं,
खो कर खुद को तुझमे कहि फिर तुमको संम्भालू मैं,
सिमट जाऊ तुझमे पूरा यूँ के फिर बीच मे धर्म न कोई जात हो,
काश किसी दिन तुझसे यूँ मुलाकात हो………..

 

यूँ मुलाकात

पहली मुलाकात

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