किसान

किसान

मैं कहने को तो एक किसान हूँ,
जो खेतों खलियानों में बीज बो कर फ़सल उगाए,
तपती धूप में भी जो खेतों में हल चलाये,
रूखी सूखी खाकर अपना और अपने परिवार का पोषण करें,
साहूकारों औऱ सरकारों के कर में अपनी ज़िंदगी बिताए,
पसीनें के साथ खून की बूंद तक गिरवीं रखवाए,
कृषि प्रधान कहें जाने वाले इस देश में किसानों का दर्द जानें कौन,
हर संकट की घड़ी में भी अनाज का उत्पादन करते है,
फिर भी कई बार भस्टाचार का शिकार बनते हैं,
जो दर्द सह नहीं पाते वे आत्महत्या के शिकार होते है,
जो जीवित रह जाते है वह भी मज़बूरी में अपना जीवन व्यतीत कर लेते है,
अनेकों कवियों की आवाज़ हूं मैं जो तालियों के शोर में कहीं गुम हो जाती है।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

विचारआखिर क्यों?विषय शून्यNews Updates

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