कुछ अंश

कुछ अंश

कुछ अंश

🌹किसी से बातचीत🍂🍃 के दौरान बातों के कुछ अंश🌹

उसने कहा वो🍂🍃 लोग भी अच्छे हैं,,

मैंने कहा,,,,,

मुझको तुम बुरे भी अच्छे लगते हो,,
झूठ बोलते हो मगर सच्चे लगते हो,,

माना खिले हैं सैंकड़ों फूल शाखों पर,,
मगर मुझमें उलझे तुम गुच्छे लगते हो,,

मुझको सारे जहाँ से क्या लेना देना,,
उन सच्चों में मुझे तुम सच्चे लगते हो,,

दुनिया कहती है बड़े चालबाज हो,,
मगर मुझे तुम नादान बच्चे लगते हो,,

मुझे तुमने तोड़ा बड़ी होशियारी से,,
पर सचिन तुम अक्ल के कच्चे लगते हो,,

कुछ अंश

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
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मेरी स्वंयरचित🍂🍃 एक रचना

परिवारऐसा परिवार अब कहाँकुटुम्ब

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