Hindi Poetry

कोरोना

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कोरोना

हम हर एक परिस्थिति से कुछ ना कुछ सीख सकते हैं, कोरोना से हम पहचान किस तरह की होनी चाहिए, यह सीख सकते

कोरोना
इतिहास बना दें ऐसे, जैसे कर दिखलाया कोरोना।
अपने भीतर जितने दुश्मन, है उनका अब नहीं होना।।

झूठ, कपट, आलस्य त्यागकर, हम अधिकारिक विजयी बनें।
किस पथ पर कितना चलना है, ये भी अब हम स्वयं चुनें।।

मंजिल तक जो रस्ता जाता, हम उस रस्ते के हो लें।
अपने हक का हर एक मंज़र, खुद से लूट सके तो लें।।

जो कहता है क्या, क्यों, कितना, खुद प्रतिकारित हो जाएगा।
खुद को, खुद से, खुद में देखें, सब परकाशित हो जाएगा।।

जाना वहां, जहां जाने को निकले कल से कल खातिर।
कर दिखलाना, है हमको कुछ भाषण में तो जग माहिर।।

(एन. के. जैन)
@naman9203

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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