खिलौना

इस ज़िन्दगी के खेल में
मेरा बस एक ही खिलौना है,
बहुत प्यारा है वो मुझे
सबसे सलोना है।

वो मेरा राजा बेटा है
वो मेरी रानी गुड़िया है,
मेरे आँगन की बस
वो ही एक चिड़िया है।

वो शाम की ठंडक है
वो धूप सलेनी है,
अच्छे तो बहुत हैं दुनिया में
पर वह सबसे सोणी है।

जो शिकन मेरी दूर करे वो
वह माथे की बिंदिया है,
जो सुकून देती मुझे वो
वह आँखों कि निंदिया है।

जो मेरी ज़िन्दगी को महकाए
वह फूल वो है,
उसके कदमों में पड़कर को मखमल सी हो जाए
वह धूल हूँ मैं।

फूल से गिरते हैं
जब वह मुस्कुराती है,
पतझड़ हो जाता है
जब वह रोने लग जाती है।

मन लगता नहीं कहीं फिर
जब भी वह मुझे बुलाती है,
मैं आ नहीं पाती बेटा
पर याद तेरी बहुत आती है।

तेरी अलमारी तो खिलौनों से भरी है
पर मेरे पास बस एक ही खिलौना है,
मेरी ज़िंदगी की खूबसूरती की वजह
तेरा ज़िन्दगी में होना है।

खिलौना

~ संस्कृति

 

Entry No. THG023

Date 29-10-2020

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2 thoughts on “खिलौना”

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