खुद्दारी

इस जहाँ में खुद्दारी ना होती,
हम ना होते वफादारी ना होती।

अगर इन्सानियत का यही उसूल है,
तो बड़ी बातें करना फिजूल है।

हैवान जब तुम्हारे अन्दर खड़ा है,
मेरी मानो जानवर तुमसे बड़ा है।

फर्ज और कर्म दोस्तों वाली करता हूँ,
चोरों से घर बचा पर्व दिवाली करता हूँ।

खुद भले तुम्हारी गालियों से रोता हूँ,
तुम्हारे घर की हर पल रखवाली करता हूँ।

हैवानियत के चक्रव्यूह में फस जाते हो,
नाग बन आकर मुझे ही डस जाते हो।

जख्म देकर मुझे आखिर क्या करते हो,
खुद से ही तुम क्यों दगा करते हो।

मैनें मालिक के आगे हमेशा सिर झुकाया है,
तुम्हारे नमक का मैंने ऋण भी चुकाया है।

तुमको वो सब तो दे दिया है मैंने,
अंश भोजन का जितने तुम्हारा खाया है।

हमारे बिना तुम्हारे वाली कौन करेगा,
मार खाकर भी घर की रखवाली कौन करेगा।

✍🏻साक्षी😊
@_sakku_writes

खुद्दारी

भावना एहसासख़तराफर्ज़, News-Updates

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