खुद की दुनिया

वो पिता है….

वो पिता है जो सहता है,

खुद की दुनिया जो नयी आखो में सजाता है
जो हमारी एक मुस्कान के लिए पूरी दुनिया में नाचता है
वो पिता है जो सहता है,

जो खुद चाहे कम पढ़ा हो,
पर वो पूरी दुनिया का ज्ञान हमे दिलाता है
वो पिता है जो सहता है,

हमे रेशम की दरी में चैन से सुला कर
जो मैली ज़मीन पर ख़ुशी ख़ुशी सो जाता है
वो पिता है जो सहता है,

हमे घर की छाओ में रखने के खातिर
खुद धूप भरी गलियारो में गोते खाता है
वो पिता है जो सहता है,

हमारा सर पूरी दुनिया में उठाने को
वो ख़ुशी ख़ुशी उसी दुनिया में सर झुकाता है
वो पिता है जो सहता है,

हमें शिष्टाचार सिखाने को वो
अपने कोमल मन को छुपाये, हम पर क्रोध जताता है
वो पिता है जो सहता है,

हमारी एक जीत में चाहे हमें कुछ न जताए
पर मन में खुशियों के आंसू बहाता है
वो पिता है जो सहता है ।

-: अंशुल जैन :-

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