खुशी परिवार था

खुशी परिवार था

जब जन्मी खुशी परिवार था,
जब बिखरी दुखी पूरा परिवार था।

जब संभली साथ परिवार था,
जब डगमगाई संभाल परिवार ने की।

जब कुछ पाया,
पूरे परिवार संग बांटा।

जब कुछ खोया,
पूरे परिवार ने दिया।

खुशी हो या गम,
हर पल बस एक परिवार ही संग था।

गलती की माफ़ी मिली,
अच्छा किया शाबाशी मिली।

जन्मीं तो परिवार मिला,
मृत्यु हुई तो भी परिवार संग था।

हर पहलू में हैं परिवार,
सचमुच जीवन का सच्चा सार हैं परिवार।

©दीपशिखा अग्रवाल। 😍

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