Hindi Poetry

गरीब

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क़िस्मत गरीब की भी एक दिन खुदा बदल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,
क़िस्मत गरीब की भी,,,,,

(1) पूरी उम्र गुजारी रहकर के छप्पर छाते,,
राहें बनाई हमने नित महल हम बनाते,,
खुशियाँ मिले जहां बस कोई ऐसा पल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,

(2) रुपयों वाला आके हमकों ये भिक्षा देता,,
करनी पड़े गुलामी हमकों ये शिक्षा देता,,
दुखों का हो निवारण कोई तो हमकों हल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

(3) मर जाये यूँ ही एक दिन राहों में हम तड़पकर,,
फ़िर देख लेना आके तू भी तमाशा जी भर,,
सचिन खुदा के दर पर मुझे साथ लेके चल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
Insta id,, burning_tears_797

ग़रीबीझूठ और फरेब की दुनियादोस्तीNews

About Post Author

Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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