गुमनाम सी ये ज़िन्दगी…

चारो ओर है अंधेरा न हुआ अभी सवेरा,
बस यूँही ढलते जा रही, गुमनाम सी ये ज़िन्दगी…..
न हमे खबर उसकी,न उसे खबर हमारी,
बस यूँही चलते जा रही गुमनाम सी ये ज़िन्दगी…..
न तपन आग की हैं, न धूप सावेर की है,
न जाने फिर भी क्यों जलते जा रही गुमनाम सी ये ज़िन्दगी….

-सन्नी रोहिला

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