घर की चौखट

घर की चौखट

अब सुबह चिड़िया घर की चौखट पर आती है,
सुबह की भोर में सूरज का प्रकाश घर के आँगन में आता है,
अब हर रोज सब साथ मिलकर बैठते है,
हर शाम अब सभी लोग आँगन की हवा एक साथ लेते है,
वातावरण भी अब काफ़ी खुशमिजाज लगता है,
शाम को अपने घर जाती हुई चिड़ियों का झुंड आसमान में दिखता है,
शाम को अब आसमान में विभिन्न एक समान रंग दिखते है,
चाँद, तारों और हवा का सब मिल अब आंनद लेते है ,
परिवार के सभी लोग अब एक दूजे को वक़्त देते है,
गंगा, यमुना की जलधारा भी अब पहले से स्वच्छ लगती है,
प्रदूषण का अब नामोनिशान सा मिटता हुआ लगता है,
अब छत पर सभी पड़ोसी अपने आँगन में नज़र आते है,
दोस्त, रिश्तेदार अब फोन पर हालचाल पूछते है,
सुबह, शाम सब साथ मिल रामायण, महाभारत देखते है,
किचिन में अब सब साथ मिल पकवान बनाते है,
रात में सब मिलकर खाना भी खाते है,
बच्चे और बड़े लूडो में साथ सारा दिन लगे रहते है,
अब छत पर हर रोज़ सबके संग खेल होते है,
देखों अब दूसरों के घर न मिलकर भी लोग दिलों के करीब होने लगें है,
अब परिवार के सभी लोग एक दूसरे पर ध्यान रख ख़्याल करते है,
प्रकृति भी अब ख़ुद को संभाल पा रहीं है,
बस अब कुछ लोग है जो विषैले पदार्थ बनाकर,
अपना और पृथ्वी के विनाश के मार्ग बना रहे है,
हमें एक साथ मिलकर सबका साथ देना होगा,
पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त बनाना ही होगा,
यह इंसान अब और कितनी गलतियां और करेगा,
गर जो गलतियों को न सुधारा तो स्वयं सहित पूरी सृष्टि के विनाश का कारण होगा ।

– आलोक कुमार राठौर
@Ehsaas_Ki_Awaaz

मैं समय हूंआईनापृथ्वी माँNews

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