जातिवाद

जातिवाद

बाँटते-बाँटते इतना बंट गए,
अब और कितना बांटोगे।
बीज लगाकर बबूल का
आम तो नहीं काटोगे।

इस रूढ़िवादी ने,
कितने का घर बर्बाद किया।
ऊंच-नीच, जात-पात कहकर
जीवन नरक वास किया।

नमक की बात है क्या?
पानी को भी तरसाता है।
औकात में रहकर बात कर
हर बात पे, जताता है।

आज़ाद भी है, कानून भी है
फिर भी रोज़ छपता है अखबारों में।
जान लेकर रूढ़िवाद ने
लटकाया है पेड़ों में।

भगवान ने तो बांटा नही
तुम अब कोई आग न लगाओ।
दिमाग से भी दिल से भी
जातिवाद का फ़र्क़ मिटाओ।
हम एक है , यह सोचकर।
उम्मीद का दीया जलाओ।
उम्मीद का दीया जलाओ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

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