Hindi Poetry

जातिवाद

0 0
Read Time:59 Second

जातिवाद

बाँटते-बाँटते इतना बंट गए,
अब और कितना बांटोगे।
बीज लगाकर बबूल का
आम तो नहीं काटोगे।

इस रूढ़िवादी ने,
कितने का घर बर्बाद किया।
ऊंच-नीच, जात-पात कहकर
जीवन नरक वास किया।

नमक की बात है क्या?
पानी को भी तरसाता है।
औकात में रहकर बात कर
हर बात पे, जताता है।

आज़ाद भी है, कानून भी है
फिर भी रोज़ छपता है अखबारों में।
जान लेकर रूढ़िवाद ने
लटकाया है पेड़ों में।

भगवान ने तो बांटा नही
तुम अब कोई आग न लगाओ।
दिमाग से भी दिल से भी
जातिवाद का फ़र्क़ मिटाओ।
हम एक है , यह सोचकर।
उम्मीद का दीया जलाओ।
उम्मीद का दीया जलाओ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

क्योंकि हम इंसान हैं

News Updates

About Post Author

Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

%d bloggers like this: