Monologues

जीवन का सार

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जीवन का सार, एक सभा में कर्म, किसमत और ईश्वर पर चर्चा चल रही थी!
वही किसीने कहाँ:-“वक़्त से पहले और किसमत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता!”
दुसरें ने कहाँ: -“सत्य हैं यह बात किंतु क्या कर्म का कोई महत्व नहीं?”तभी एक ओर से आवाज़ आई: -” श्रीमद्भागवतगीता में श्रीकृष्ण ने कहाँ हैं- “कर्म प्रधान विश्व करी राखा”;
अर्थात् कर्म में वह शक्ति हैं जो भाग्य बदल सकता हैं!
हमें हमारा कर्म करना चाहिए,फल की चिंता नहीं करनी चाहिए! ईश्वर हमारे कर्मों का फल हमें अवश्य देगें!
फिर एक और विद्वान ने कहाँ:-” कर्म ही एक ऐसी चिज़ हैं जो मनुष्य के अनुसार होता हैं!अच्छे कर्म अच्छे परिणाम एवं सुख का अनुभव करवाती हैं; जहाँ बुरें और गलत कर्म हो वहाँ ईश्वर की कृपा नहीं होती एवं परिणाम भी भयानक होतें हैं या कह लो: – “जैसी करनी वैसी भरनी”!
इसीलिए कहाँ हैं: -“कर्म प्रधान विश्व करी राखा”;कर्म में वह ताकत हैं के भाग्य बदल दें, रंक को राजा और राजा को रंक बना देता हैं!अगर आप अथक परिश्रम एवं प्रयास करें, अपने कर्मपथ पर बनें रहे तो ईश्वर को भी अपना फैसला बदलना पड़ता हैं!
जैसे सावित्री ने अपनी पत्नीव्रता धर्म से, अपने सच्चें कर्म से न सिर्फ अपने पति के प्राण पाएं परंतु अमर सुहाग का वरदान भी पाया!महाभारत में अर्जुन ने अपने कर्म का पालन कर धर्म की स्थापना की थीं! इसीलिए कर्म सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं! जीवन का सार

©दीपशीखा अग्रवाल!

 

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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