Writer's Special

तन से नर ह्रदय से नारी

1 0
Read Time:7 Minute, 41 Second

यह कहानी है प्रिया जो नोएडा में एक अच्छी कंपनी में मैनेजर के पोस्ट पर काम कर रही है और उसके 16 साल के भाई की

प्रिया कुछ दिन के लिए अपने घर आई हुई है, और आज उसे कहीं जाना है।
उस सुनहरी शाम, बच्चे खेल रहे थे सूरज ढल रहा था कि तभी एक जोर से आवाज आई
प्रिया : मम्मी………. आज मेरी ब्लैक ड्रेस नहीं मिल रही है।
मम्मी : क्या? तुम अपनी चीजें संभाल कर नहीं रखती हो इसलिए नहीं मिलती ।
प्रिया : लेकिन मम्मी, मैंने तो कल ही अपनी ब्लैक ड्रेस आयरन करके कबर्ड में रखी थी आज जो मुझे उसे पहना था।
(मम्मी और प्रिया उसे ढूंढती हैं मगर वह नहीं मिलती)
मम्मी : ऐसा कर प्रिया कि तुम कोई दूसरी ड्रेस पहन लो जल्दी तैयार हो वरना लेट हो जाएगा। प्रिया : मगर मम्मी….
मम्मी : अब ज्यादा अगर मगर मत करो लौटकर आएंगे तब देखेंगे और देख जाकर वासु तैयार हुआ कि नहीं……

प्रिया : ठीक है (गुस्से से)

प्रिया : वासु तू तैयार है?
वासु : मैं नहीं जा रहा दीदी…
प्रिया : मगर क्यों ? आज तो तेरा बेस्ट भाई हिमांशु भी आ रहा है फिर क्यों?
वासू : नहीं, दीदी मुझे पढ़ना है कल मेरा अकाउंट का टेस्ट है।

प्रिया : पक्का तू नहीं जा रहा है?
वासू : हां, मैं नहीं जा रहा है।
प्रिया : अच्छा ठीक है, क्या तूने मेरी ब्लैक ड्रेस देखी है?
वासू : (और फिर शांति)
प्रिया : अरे तू इतनी सोच में क्यों पड़ गया कहीं तूने हीं तो……….
वासू : नहीं नहीं, मैं नहीं जानता अब आप जाओ यहां से….

(वासु प्रिया को कमरे से निकाल के दरवाजा बंद कर लेता है)

प्रिया : अरे वासु मैं तो मजाक कर रही थी और तुम क्या करोगे मेरी ड्रेस का……

कुछ देर बाद…

प्रिया : वासू हम जा रहे हैं खाना बनाकर रख दिया है खा लेना और अपने साथ एक्स्ट्रा की ले जा रहे हैं। ठीक दरवाजा बंद कर लो।

करीब 2:00 बजे प्रिया और उसकी माँ घर लौटते हैं।

प्रिया : वासू को देख कर आती हूं.. माँ।

प्रिया : वासु तू कमरे में है, ही नहीं। चलो अच्छा है, अब मैं उसके गिफ्ट्स यहां रख दूंगी। जैसे ही प्रिया अलमीरा खोलती है। उसकी ब्लैक ड्रेस, बैंगल्स, लिपस्टिक और भी कई चीज है जो कई दिनों से गायब हो चुकी थी, वो सब दिखती है। फिर प्रिया उसका मोबाइल चेक कर दिया जिसमें वासू की कई पिक्चर्स थी उसकी ब्लैक ड्रेस और कई कपड़ों में……

तभी बासु के आने की आवाज सुनाई देती है प्रिया जल्दी से कबर्ड बंद करती है और वहां से भाग जाती है।

पूरी रात प्रिया सो नहीं पाती है और सिर्फ वासु के बारे में सोचती है। क्या सच में मेरा वासु………

वासु की हाव-भाव के बारे में सोचती है और फिर……..

अगले दिन प्रिया, मां मैं मार्केट जा रही हूं। अभी 1 घंटे में आ जाऊंगी।
माँ : ठीक है बेटा मगर जल्दी आना।
प्रिया लौट कर सीधे, बासु के कमरे में जाती है। (जहां वासु अपनी फोटो को निहार रहा होता है)
कि तभी प्रिया कहती है, तू मुझसे भी ज्यादा अच्छा लग रहा है इस ड्रेस में….।।

वासू जल्दी से अपना मोबाइल बंद कर देता है और कहता है आपको दरवाजा खटखटाकर आना चाहिए था ऐसे किसी के कमरे में नहीं आते।

प्रिया : अरे, तो क्या हुआ मैं अपने भाई के कमरे में तो आई हूं।
वासू : पर दीदी, दीदी वो, मैं – मैं।
प्रिया : अरे,पागल मैं मैं क्या कर रहा है। सच में तुम मुझसे भी ज्यादा अच्छा लग रहा है और सिर्फ इसी में नहीं सारी ड्रेसेस में।

वासू : दीदी यह क्या कह रही हो आप…
(प्रिया उसको अपने पास बिठाती है और शांत कराती है)

प्रिया : वासू मैं सब जान चुकी हूं, कल मैंने सब देख लिया।

वासू : दीदी प्लीज आप यह किसी को मत बताना। आप जो भी कहोगी, मैं वह सब करूंगा बस आप किसी को कुछ मत बोलना।

प्रिया : वासु वासु जस्ट रिलैक्स, देख मैं तेरे लिए क्या लाई हूं।
वासू : क्या लाई हो दीदी?
प्रिया : तू खुद देख।
(वाशु आश्चर्य में पड़ जाता है) वासू : दीदी यह क्या!
प्रिया : तुझे पसंद नहीं आई।
वासू : नहीं दीदी आई ना, बहुत पसंद आई मगर क्या सच में यह मेरे लिए ही है?

प्रिया : हां, पागल तुम्हारे लिए यह और खबरदार आगे से मेरी ड्रेस पहनी तो। तू बहुत मोटा है और मेरी ड्रेस फट जाएगी।
(वासु प्रिया को गले लगा लेता है और उसकी आंखों से बराबर आंसू निकल रहे होते हैं।)

प्रिया : वासु छोड़ मुझे वरना मैं मर जाऊंगी।
(दोनों खूब हंसते हैं और बराबर उनकी आंखों से आंसू बह रहे होते हैं)
वासू : थैंक्यू दीदी मुझे लगा था कि आप……..
प्रिया : अरे, पागल तू मेरा भाई है और शायद मैं बहुत लकी हूं कि तू मेरा भाई है।

वासू : आई लव यू दीदी।
प्रिया : आई लव यू टू वासु।

वासू : दीदी मगर मां पापा?
प्रिया : हम दोनों साथ चलकर मां पापा को सब बताएंगे और वो समझेंगे। चल तू मेरे साथ।

वासू : नहीं दीदी जैसा चल रहा है, चलने दो पापा नहीं समझेंगे।
प्रिया : अरे तू चल तो।

(दोनों सब साथ में वासू के बारे में मां पापा को बताते हैं। जैसा की वासु ने बोला था वैसा ही हुआ पापा नहीं समझे उन्होंने तुरंत अपने सारे रिश्ते नाते वासू से तोड़ लिए)

मगर मां तो मां होती है उसका दिल तो वहीं पसीज गया। मगर वह कुछ ना कर सकी।

आज वासू प्रिया के साथ नोएडा में ही रह रहा है। जैसे जीना चाहता था वैसे अपनी जिंदगी जी रहा है। आज एक अच्छे इंस्टिट्यूट में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रहा है।
दोनों भाई बहन बहुत खुश है।
मां रोज बात करती है फोन पर मगर पापा आज भी नाराज़ है। मगर वासु और प्रिया दोनों को उम्मीद है कि शायद एक ना एक दिन पापा भी जरूर मान जाएंगे और वो वासु को अपना लेंगे……….।

तन से नर ह्रदय से नारी

सिमरन (प्रतिष्ठा दीक्षित)
Words_by_simran

 

Entry No. THG024

Date 29-10-2020

Also, Read… News, एक गुजारिशअतीतत्याग

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

15 thoughts on “तन से नर ह्रदय से नारी

  1. सचिन जी आप बहुत अच्छा लिखते है। इंडिया के लेखकों के लिए एक सुनहरा अवसर है। एक प्रतियोगिता चल रही है, जिसमें ढ़ेरों इनाम भी है। क्या आप इसमें भाग लेना चाहेंगे? अगर आप उत्सुक हो तो आप मुझे बताए तो मैं आपको सारी details भेजूंगी।

Leave a Reply

%d bloggers like this: