तुम ही आना

तुम ही आना

बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।
ईरादे फिर से जाने के,
नहीं लाना तुम्हीं आना।

एक खुबसूरत रिश्ता हैं हमारा,
एक अनोखा बंधन हैं हमारें दरमियाँ।
इश्क़ हैं यह जान गए हैं हम,
बस तेरी यादों के सहारे जी रहें हैं हम
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

आज फिर बरसों बाद उसकी याद आ गई,
रातभर रोने के बाद एक मुस्कान लौट आई।
नहीं जानती थीं के खुदा फिर एक बार,
उसके पास ला रहा था मुझे।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

एक उदास दिल को सुकून मिल गया,
हाँ एक बार फिर सिर्फ उसी की वजह से मैं जी गई।
शायद उसकी याद न आती अगर,
तो खुद को कोस-कोसकर मर जाती मैं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

मगर फिर उसकी याद आई,
और मेरी आत्मा को छु गई।
प्यार अधूरा था मगर सच्चा था,
शायद इसीलिए तो खुद खुदा ने भी उसकी याद दिलाई।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

बरसों पहले एक बार जीना भूल गई थी मैं,
तब उसीने आस बांधी थीं।
आज जब फिर ऐसा लगा के मर रहीं हूँ मैं,
सब मेरी ही गलती हैं और सब मैनें ही बिगाड़ा हैं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

तब फिर वो याद आ गया,
और मुझे मरने से बचा लिया।
इश्क़ हैं या ईबादत या कुछ और मैं नहीं जानती,
ना आज तक समझ पाई हूँ और शायद न कभी पाऊँ।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

मगर जब भी जिंदगी बोझ लगने लगती हैं,
वो हमेशा याद आ जाता हैं।
उसके बिना जी रहीं हूँ मैं,
और जीते रहूँगी ये जिंदगी भला कभी रुकीं हैं क्या किसी के लिए।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

मगर फिर भी यही सोचतीं रहतीं हूँ मैं,
के बिना उसे जाने बिना पहचानें कैसे हमेशा वो ही याद आ जाता हैं मुझे।
न कोई नाता ना कोई संबंध,
फिर भी क्यों वो ही याद आता है मुझे।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

जब भी उसे याद करु हंस पड़तीं हूँ मैं,
फिर खुदको एक नन्हा सा बच्चा पातीं हूँ मैं।
पाना नहीं चाहतीं उसे शायद न पाकर भी पा चुकीं हूँ उसे,
मगर ये कैसा अद्भुत अद्वितीय नाता हैं यहीं सोचतीं रह जाती हूँ मैं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

एक नन्हा बालक जाग उठता हैं मेरे अंदर,
और बस उसी बालपन में मग्न होकर सभी चिंताएँ भूल जातीं हूँ मैं।
क्या हैं ये पता नहीं,
क्यों हैं ये पता नहीं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

कभी उससे कहाँ नहीं,
कभी उससे सुना नहीं।
मगर फिर भी न जाने क्यों,
जब खुद को खो देतीं हूँ उसे पा जातीं हूँ।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम ही आना।

तुम ही आना

©DEEPSHIKHA AGARWAL!

माँ तू ही सब कुछ हैं

मसान

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