तुम हो या हो ना हो

तुम हो या ना हो

तुम हो या ना हो….

तुम हो
या हो ना हो
पर मेरे साथ
तुम्हारा अहसास तो है 

— सखा 🍁

मिले थे अजनबी बनकर
आज जिंदगी की जररूत हो तुम 

— सखा 🍁

बहुत से सवाल अधूरे रह गये
जिनके जवाब ………तुम थे 

— सखा 🍁

 

हर कोई अभीमन्यू नहीं,
जो अपनीं माता के गर्भ में सब सीख जाएं।

हर कोई इंसान तो हैं,
जीवन हैं चाहें तो सबकुछ वरना कुछ भी न सीख पाएं। 

— ©दीपशीखा अग्रवाल!

कहतें हैं आंखे बोलतीं हैं,
सच ही तो हैं यहीं दिल के सारे राज़ खोलतीं हैं।

–©दीपशीखा अग्रवाल!

 

मैंने पूछा कि ‘तबाही’ क्या है!

उन्होंने हाथ छोड़ के पैगाम दिया।

–Topiwala🤠

 

मैंने पूछा”वादा” क्या है ?
उन्होंने मेरे हाथों को अपने हाथों में थाम लिया

— सखा 🍁

 

मैंने पूछा उनसे ‘फरेब’ क्या है।

उन्होंने हर वादे को झुठला दिया।

–Topiwala🤠

मैंने पूछा उनसे ” रिश्ता ” क्या है
उन्होंने माँग में सिंदूर दिखा दिया

— सखा🍁

मैंने पूछा कुछ बताओ ‘विरह’ पर उन्होंने बिन बताये रिश्ता तोड़ दिया

–Topiwala🤠

 

उन्होंने कहा कुछ लिखो ” प्रेम ” पर
मेने उनका ” नाम ” लिखकर छोड़ दिया

— सखा🍁

 

उसकी तस्वीर देख आज भी खुशी से झुम उठती हूँ,
फ़िर याद आता हैं हम साथ नहीं और दुखी होकर रो पड़ती हूँ |
क्या करू इश्क़ आज भी करती हूँ,
उसे याद हर रोज़ करती हूँ |

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

ये अपने और पराए का खेल मेरे संग ना खेलना,
मेंने अक्सर लोगों को झूठ के नकाब में सच छुपातें देखा हैं|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

दूरीया तुमने बढ़ाई,
हम तो आज भी तुम्हारा इंतज़ार करतें हैं|
दोस्ती निभाने में चुक तुमसे हुई,
हम तो आज भी खुद को ही गुनहगार मानतें हैं|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

वो मेरा गुरूर था तुम कहतें थें,
वो मेरी खुद्दारी थीं यह जग कहता हैं|
क्या सच क्या झूठ अब यह सब जानतें हैं,
सच हैं समय सबको जवाब देता हैं|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

तुम्हें बदनाम करने की मेरी इच्छा न थीं,
मगर तुमने ही मेरी सच्चाई और अच्छाई की कदर न की|
और मजबूरन मुझे,
सच्चाई जग ज़ाहिर करनी पड़ी|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

अब अपने बारे में हम खुद क्या कहें,
दुनिया को यकीन हैं के हम बेवफा नहीं |

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

बंदगी नहीं वो सिर्फ बंदे को चाहता
पूजता हर कोई पर हर कोई न उसे पाता
जो पंडा मौलीवियो से दूर जाने पर मिल पाता
कुछ ऐसा है जी खुदा मेरा

— Arjun

 

मंज़र भी इश्क़ का बड़ा अजीबो गरीब था
वो आग से जला जो नदी के करीब था

— Ruhani_mohabbate

जब अंदाजा हुआ हमे उनकी मोहब्बत का
तो हमने खुद को बेगाना बना दिया

और जब देखा उन्हे किसी और की बाहो मे
तो आंखें भीगी और हमने तिनके का बहाना बना दिया

— ruhani_mohabbate

 

गर हम कभी मिले तो पढ़ियेगा जरूर मुझे।
मैं नायाब गलतियों की मुक्कमल किताब हूँ।
— Topiwala🤠

 

गर तुम जवाब हो तो सवाल मैं हूँ।
जो तुम शांत हो तो बवाल मैं हूँ।
गर हो गुरुर तुम तो मलाल मैं हूँ।
जो हो तिलिस्म कोई तो कमाल मैं हूँ।
— Topiwala🤠

 

तुम्हारा प्रेम,
जैसे नीला आसमान,
उसमें मैं हूँ जैसे एक पंछी,
जो छूने की चाह रखता है,
निकट समझता है हर पल जिसे,
पर है नहीं,
नहीं जान पाऊँगा तुम्हारे प्रेम का विस्तार,
और वो अनंत सीमाएँ,
जिन्हें समेटने की चाह लिए उड़ रहा हूँ।।
— ✍✍ Mohit

 

इस दौर की हवा का
रुख ही हवा हो गया
अपना कहते कहते ही वो
जाने कहाँ दफा हो गया
— Vishvajeet✨

 

हमने तुम्हें दिल से देखा है,
हमें शक्ल से क्या करना,
मुहब्बत हमारी गणित का सवाल नहीं,
हमें तुम्हारी अक्ल से क्या करना।।
— ✍✍ Mohit

 

तमाम तमन्ना ऐ तस्सवूर की तासीर ले चुका है तहरीक ऐ तकल्लुफ तेरा
मुअय्यन के मुहाने से मुआयना कर रहा है मुख्तसर माशूक ये दिल मेरा

— Topiwala🤠

 

तेरे विरह की तपिश में दहक़ रहा है ये दिल
और इस विरह अग्नि से विद्रोह करने पलकों तले से निकल पड़े है कुछ नादान अश्क़ ।
— © सपन अग्रवाल

 

कीमती हूं बहुत पर मै हीरे जवाहरात नहीं….!!!
महंगा हूं बहुत पर मै सोने की खान नहीं….!!!
और क्या कहूं किसने क्या बोला है मुझे….!!!!
दुखी हूं बहुत पर मै दुखो का सरताज नहीं…!!!

— Anshu Agrawal

 

संम्भाले नही संम्भलेगा,
जो कर रहा हैं करने दो….
इश्क़ किये बैठा हैं जालिम,
मरने दो….

— सन्नी रोहिला

 

मैं लिखता हूँ तितली
तुम उन्हें हथेलियों पर बिठा देती हो

मैं लिखता हूँ वसंत
तुम रंगों में डूबने लगती हो

मैं लिखता हूँ बादल
बिन बरसात तुम भीगने लगती हो

मैं लिखता हूँ प्रेम
तुम न जाने क्या महसूस करने लगती हो

— सखा🍁

तुम ही आना

माँ तू ही सब कुछ हैं

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