“तू चल ,न रुक”

एक राह।
तू राही….
तू चल, न रुक।
होगा क्षत-विक्षत बेशक़ तू,
तू चल, न रुक।
तू कर करम,कर प्रयास तू
होगा विफल,हो उठ खड़ा
तू चल न रुक।
न कर फिक्र अंजाम की ,न जिक्र कोई मुकाम का,
न कर कोई अगर मगर….न कर डगर की तू फ़िकर
गर करनी हो नौका पार तो क्या राह और क्या मंजर?
तू चल,न रुक।
गर पकड़ ही ली है राह तो सोचना क्या  सफर के बारे
रख धैर्य तू,न रह मौन तू,
तू चल,न रुक
रूह से जंग जीतने की तू जिदकर
तू जिद कर कुछ कर गुजरने की।
तू चल,न रुक।।
Written by :-Sapan Agrawal

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11 thoughts on ““तू चल ,न रुक””

  1. 🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤Bhut Saara pyaar bbhiya aapko❣😍😍🙏🙏🧡🧡

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  2. प्रिय सपन बहुत अच्छा लगा आपकी कलम की धार देखकर निश्चित ही तुम प्रगति पथ पर अग्रसर हो रहे हो ।आपको ये भी जान लेना चाहिए कि रुकना तुम्हारी मंजिल नही तुम्हे तो उस मुकाम को हासिल करना होगा जहां लोग तुम्हें तुम्हारी कलम की धार से जानेंगे।जहां मुझे भी तुम पर फक्र होगा।तुम्हे समाज की कुरीतियों से लेकर बच्चों की शिक्षा एवं बच्चियों के सम्मान और बुजुर्गों के मान को लिखना होगा। बहुत बहुत शुभकामनाएं और शुभाशीष और ढेर सारा प्यार ।

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    • अशेष आभार आदरणीय गुरूजी🙏।
      आपका शुभाशीष और आपके चरणों में मेरा स्थान
      ही मेरी प्रगति को सुनिश्चित करेगा ।
      आपका स्नेह हमेशा इस अकिंचन पर सदा बनाये रखना ।

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