त्याग

त्याग
इतनी क्यूँ क़ुरबत है चाँद से,
जो रोशन है किसी और के दम पर।

राब्ता उन तारों से रखो,
जो टूटते हैं,
के मुकम्मल हो दुआ तुम्हारी।

-अनूप शाह
IG: anup.154

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