दिल्लगी इस कदर

दिल्लगी इस कदर

उनसे दिल्लगी इस कदर हुई
कि उनकी इन्तिख़ाब आरजू
मुझे खा रही है।
मेरी इफ़्फ़त का जनाजा निकाल कर
वो किसी ग़ैर के साथ जा रही है।।
वो क़ाज़ी नहीं क़ातिल-ए-वफ़ा है,
मैं बैठा हूँ ख़ुद की गवाही में
और वो मेरे जनाज़े का सामान ला रही है।।

-Yogesh Sharma

 

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