परमेश्वर पिता

पिता उस परमेश्वर का दूसरा नाम है
जिसे वो मिल पाते हैं वो भाग्यवान है
उनके ना होने से निराशाऐं छाने लगती हैं
हर रोज़ डरावने भूतों सी डराने लगती हैं
उनका साथ जैसे जीत की अनुभूति सा लगता है
कभी ये सम्पूर्ण संसार एक विरक्ति सा लगता है
आज भी जब मुश्किलों से जूझता हूँ मैं
उन्हें अपने साथ खड़ा देखता हूँ मैं

याद है जब पहली बार पापा चिल्लाए थे
किसी बात से परेशान होकर झल्लाऐ थे
उस तकलीफ़ को आज समझ पाता हूँ मैं
जब कभी-कभी भूखा ही सो जाता हूँ मैं

वैसे सिर्फ कहने को तो अब उम्र ढलान पे है
पर देखूँ अभी भी मुश्किलों से हारते नहीं हैं
कोई रुकने थकने को कहे तो मानते नहीं हैं
आज भी पहले की तरह ख़ुद को कठोर दिखाते हैं
हाँ कभी-कभी थोड़ा डांट-फटकार लगाते हैं
पर उनका वो ग़ुस्सा मुझे सरगम सा लगता है
आज भी कुछ ग़लत करने पर उनसे डर लगता है
पर शायद ये डर नहीं है उनका प्यार है
चाहे कुछ भी हो पर ये उनका मयार है

मुझे पिता इस दुनिया का अस्तित्व लगता है
काटों मे खिले गुलाब सा व्यक्तित्व लगता है
वो एसा योद्धा है जो कभी हारता नहीं है
तूफानों से भी लड़ता है भागता नहीं है
दर्द कितना भी हो मैंने उन्हें रोते नहीं देखा
कई रातों तलक तो चैन से सोते नहीं देखा

कभी लगता है कि ख़ुदा ने इन्हें किस मिट्टी से बनाया है
शायद तभी राम ना होकर भी उन्हें दशरथ सा पाया है
वो शांत है, गंभीर है, मेरा ख़ुदा मेरा भगवान है
वो पिता है इस पृथ्वी पर ब्रह्मा का अवतार है

वो हमेशा मुझ पर इनायत रखते हैं
चेहरे पर जैसे रूहानियत रखते है
वो चाहते हैं कि मैं कामयाब रहूँ
इसीलिए मुझे सीने में बसाये रखते हैं

जिन तकलीफ़ों से मैं टूट जाता हूँ
उनसे तो वे हँस हँसकर खेल आए हैं
जिन खुशियों पे खुश होता हूँ मैं
उन्हें कई दफा रास्ते में छोड़ आए हैं

मुझे तो यही लगता है कि ये इन्सां नहीं ख़ुदा का साया है
जहां तहां जब भी मैं टूटा हूँ मुझे गले से लगाया है
उसका इक इक अल्फाज़ धीर और शीतल है
उसमे जैसे पूरे जीवन का सार अभिरंजित है

मेरे लिए केवल पिता ही नहीं भगवान है वो
ज्यादा कुछ नहीं मेरा आत्मसम्मान है वो…

वो पिता है….

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✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

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