Hindi Poetry

पहली मुलाकात

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की धड़कनो से कब तक सोचें तुम्हे- कब तक यूँ बेचैन आहें भरें,
बैठो सामने हमारे हो कुछ इश्क़ के सवालात- लो आज तय कर ही लेते है अपनी वो पहली मुलाकात…..

की यूँ रातों को कब तक बेहिसाब जगना हो- कब तक तुम्हे यूँ दिन भर सोचना हो,
अब हमें मिलाएगी हर वो कायनात- लो आज तय कर ही लेते है अपनी वो पहली मुलाकात…..

की गलियों मे धुन्डते हुए तुझे- वक़्त को पीछे छोड़ आता हूँ-,
निकलता हूँ कही भी शहर मे अक्सर- और खुद्को तेरी तरफ ही मोड़ लेता हूँ …..

 

एक हमारा वक़्त मुकरर हो- हो कुछ जिंदगी के कुछ वायदे,
हो अपनी ही दिल की सब बात- लो आज तय कर ही लेते है अपनी वो पहली मुलाकात…..
✍kabiryashhh✍

मुलाक़ात अधूरी है साहब

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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