पास तेरे अब किनारा है

पास तेरे अब किनारा है

क्या है वह जो तुझे सताता है,
क्यों नहीं तू भी आसमान की तरफ अपना सर उठाता है,
क्यों नहीं लोगों को अपनी तकलीफ तू बताता है,
क्या है वह जो तुझे सताता है…

किस बात का तुझे दर है,
एक तू है और मिलों तक फैला यह अंबर है,
हिम्मत तो कर, उड़ने को तेरे पास भी पर है,
फिर भला किस बात का तुझे दर है…

तुझे किस बात की अब राह है,
हासिल कर जो भी तेरी चाह है,
हर कदम पर अल्लाह की तुझपर निगाह है,
तो फिर किस बात की तुझे अब राह है…

मुस्कुरा थोड़ा के पास अब किनारा है,
दुखों का हट चुका कोहरा है,
खुल चुका खुशियों पतारा है,
की अब तो थोड़ा मुस्कुरा और देख कितना पास तेरे किनारा है…
❣️❣️
– Rishit Parekh

पास तेरे अब किनारा है
@rishit_rocks

#WRITEROFTHEMONTH

Entry No. THG016

Date: 23rd Oct 2020

Also, Read… Newsउम्मीदएक गुजारिशअतीत

1 thought on “पास तेरे अब किनारा है”

Leave a Reply

%d bloggers like this: