Hindi Poetry

पिता एक नायक

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बयां नहीं करते अपना दर्द-
ना कभी शिकन लाते अपने सिर पर,
वो हर वक़्त मेरी ही चिंता करते हैं-
साहब पिता तो पिता होते हैं …..
…..कन्धो पे सिर रखकर रोया हूँ मे उन्के-
कभी खुशी से झूम उठा हूँ उनकी बातें सुन के,
रख रखे हैं मैने भी कई सपने चुन्के-
कई तोह्फे देने हैं उन्हे यूँ बुन्के…..

लेते हैं मेरे हिस्से के सभी संघर्ष-
फ़िर करते हैं प्यार से मेरे माथे को स्पर्श,
वह हर दिन कुछ नया सिखाते हैं-
वही तो हमारे पिता कहलाते हैं…..
…..कन्धो पे सिर रखकर रोया हूँ मे उन्के-
कभी खुशी से झूम उठा हूँ उनकी बातें सुन के,
रख रखे हैं मैने भी कई सपने चुन्के-
कई तोह्फे देने हैं उन्हे यूँ बुन्के…..

टूटने नहीं देते हैं कभी मुझे-
जिंदगी मेरी चाहे उलझे या सुलझे,
वह तत्परता से मुझे बचाते हैं-
दोस्तो! वही तो पिता कहलाते हैं…..
…..कन्धो पे सिर रखकर रोया हूँ मे उन्के-
कभी खुशी से झूम उठा हूँ उनकी बातें सुन के,
रख रखे हैं मैने भी कई सपने चुन्के-
कई तोह्फे देने हैं उन्हे यूँ बुन्के…..

हर ख्वाईश को मेरे पंख लगाये है-
मेरी जीवन की क्रांति को पंख लगाये हैं,
वो हर मोड़ पे मेरे सहायक बन जाते हैं-
पकड़ते हैं मेरा हाथ हमेशा और नायक बन जाते हैं…..
…..कन्धो पे सिर रखकर रोया हूँ मे उन्के-
कभी खुशी से झूम उठा हूँ उनकी बातें सुन के,
रख रखे हैं मैने भी कई सपने चुन्के-
कई तोह्फे देने हैं उन्हे यूँ बुन्के…..
✍Kabiryashhh✍

परमेश्वर पिता

वो पिता है….

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पिता एक नायक हैं

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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