Hindi Poetry

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं

0 0
Read Time:3 Minute, 50 Second

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं, लंबे सुंदर पेड़,
पर्यावरण के सुंदर दृश्य।
उन खूबसूरत झीलों के मनोरम दृश्य,
बहने वाले झरने और नदियाँ।
उन अजीब रंगीन फूल,
वे नेत्र-सुखदायक सूर्योदय और सूर्यास्त।
सर्दियों के दौरान कि बर्फबारी,
कि बारिश की बारिश से मंत्रमुग्ध।
माउथवॉटरिंग फलों की वह खुशी,
फूल चूसने वाले अमृत का वह आनंद।
सब कुछ इतना अद्भुत,
सब कुछ इतना सुंदर।
सब कुछ इतना शुद्ध,
सब कुछ इतना उदार।
सब कुछ इतना आकर्षक,
सब कुछ इतना उड़ाने वाला मन।
कुछ भी नहीं बर्दाश्त क्षति,
मौत को कभी बर्दाश्त नहीं किया।
लेकिन अब हम कई पौधों, जानवरों और सभी जीवित प्राणियों की मृत्यु को देखते हैं,
नहीं, हम उनके निर्माता नहीं थे और इसलिए हमें उन्हें मारने का अधिकार भी नहीं है।
वे इस खूबसूरत वातावरण का एक हिस्सा हैं,
वे इस ईश्वर की बनाई दुनिया का हिस्सा हैं।
लेकिन अब इंसान बदल गया है,
उसने अपने लाभ के लिए प्राकृतिक वातावरण को मारना शुरू कर दिया है।
सूर्य की किरणें जो लंबे समय तक खेलने में असीम आनंद देती हैं,
जीवन को नष्ट करने वाले में बदल गए हैं।
चाँद और तारे बहुत दूर,
चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण ब्रीफिंग हम पर श्राप देता हैं।
अब पर्यावरण टुकड़ों में बिखर गया है,
समय बीतने के साथ वहां की प्राकृतिक सुंदरता विलुप्त हो रही हैं।
लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाएं कठोर मौसम की वजह से होती हैं,
लेकिन हम इंसान पीड़ित हैं।
यहाँ भी वे शिकायत कर रहे हैं,
उनकी गलतियों को छोड़कर नहीं।
इस खूबसूरत स्वर्गीय जगह को बनाते हुए,
प्राकृतिक अंतिम संस्कार का घर और इससे ज्यादा कुछ नहीं।
पानी बर्बाद हो रहा है,
वायु प्रदूषित हो रही है।
नदियों की हत्या की जा रही है,
शांति की आशाओं के साथ धरती को पाला जा रहा है।
इस तरह प्राकृतिक वातावरण का क्रूर अंत हो रहा है,
इसे रोक! यह आपके लिए ही है।
यह था, यह है और यह आपको और हमेशा के लिए लाभान्वित करता रहेगा,
जरा ध्यान रखना।
ज़्यादा पेड़ लगाओ,
पानी बर्बाद करना बंद करो।
हाथ मिलाएं और इसे बचाने के प्रयास शुरू करें,
इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

दिन अब आश्चर्यजनक लग रहे हैं,
अब केवल शुद्ध वातावरण हैं कोई प्रदूषण नहीं।
प्रकृति को मनुष्यों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा हैं,
अब प्रकृति भी अपना बदला इंसानों से लेगी।
सतर्क रहें और इसे नुकसान न पहुंचाएं,
सुरक्षा करें एवं सुरक्षा पाएं।
क्योंकि जहां यह पोषण करना जानती हैं,
वहीं वह तबाही मचाना भी जानती हैं।

©️दीपशिखा अग्रवाल! 😍

विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💚

जिंदगी कुछ कमाल कर

मोहजाल में फंसी राधिका

Real Time News Updates

About Post Author

Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

%d bloggers like this: