प्रकृति खफ़ा बहुत है,

ये बिन मौसम बारिश का बरसना,
सर्द मौसम में भी पसीनों का टपकना,
ईशारा कर रहा है,
प्रकृति खफ़ा बहुत है।

पंछियों का तो आसमान में उनमुक्त उड़ना,
पर तुम्हारा घरों में यूं क़ैद हो कर रहना।
इशारा कर रहा है,
प्रकृति खफ़ा बहुत है।

सरपट भागती-दौड़ती ज़िंदगी का,
अचानक से ठहर जाना।
इशारा कर रहा है,
प्रकृति खफ़ा बहुत है।

बहुत प्रताड़ित कर लिया बेजुबाँ जीवों को,
अब ख़ुद का संहार होते देखना।
इशारा कर रहा है,
प्रकृति खफ़ा बहुत है।

-aayushiee

 

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