Hindi Poetry

प्रतिज्ञा…

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प्रतिज्ञा थीं रावण वध की,
प्रतिज्ञा थीं दुष्टों का नाश करने की।

प्रतिज्ञा थीं धरती को पाप मुक्त करने की,
प्रतिज्ञा थीं धरती को श्राप मुक्त करने की।

प्रतिज्ञा थीं बुराई पर विजय प्राप्त करने की,
प्रतिज्ञा थीं अच्छाइ का पताखा फहराने की।

चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार किया,
ऋषि-मुनियों का आदर किया।

सीता हरण का काण्ड हुआ,
हनुमान जी के कारण सुंदरकांड हुआ।

अनेक राक्षसों का अंत हुआ,
अनेक मर्यादाओं का पाठ सिखाया गया।

राम-राम के नाम से पत्थर तिराए गए,
समुद्र पर सेतु का निर्माण किया गया।

वानर सेना संग युद्ध लड़ा,
दशानन का अंत किया।

तब जाकर पावन पर्व आया,
अच्छाई और मर्यादा का आरंभ हुआ।

प्रतिज्ञा पुर्ण हुई,
राम राज्य की स्थापना हुई।

©दीपशीखा अग्रवाल!

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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