प्रेम गीत…

 

pexels-photo-240514 प्रेम

- बैठो इस कदर प्रियतम के पास,
भुल जाओ कहीं आना-जाना....

--हो जाओ इक दुसरे के एहसास,
वो कोमल सी राधा बन जाये
तुम बन जाओ चित्चोर कान्हा....

- मोह नहीं प्रेम करो-यही जग की रीत है,
मोह इक दिन उड़ जाएगा 
प्रेम रहे सदा मनमीत है....

- पावन मन है- है ये सावन का रूप,
यह प्रेम तुम्हे सिख्लाएगा....

-- बूँद पड़े हृदय पर खुब,
कण-कण द्वेष मिट जाएगा....

- रस-नीरस से ना परखो प्रेम को,
स्वच्छ-निर्मल सदा से है.... 

-- वाद-विवाद मे ना खोजो इसको,
हृदय धरातल मे सदा से है....

- प्रेम मोहन - प्रेम राधा है,
प्रेम मन की अविरल धारा है.... 

-- प्रेम कृष्ण - प्रेम राधिका है,
प्रेम का खेल का न्यारा है....

✍✍kabiryashhh✍✍

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