मजबूरी

मजबूरी

ऐसे बच्चे तो प्रकृति को भी खून के आंसु रुलाते हैं
जो मजबूरी का नाम लेकर माँ को भूखा सुलाते है ।
ऐसे बच्चे तो पत्थर का दिल भी कपाते है
जो मजबूरी का नाम लेकर पिता को बोझ बताते हैं।
क्यु हम अक्सर ज़िन्दगी की राह मे ये भूल जाते हैं
कि माँ बाप वो है जो खुद को भूलकर हमे जीना सिखाते हैं ।

-अंशुल जैन

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