मन मेरे, अब ठहर जा…

बेमतलब की इन बातों के घरौंदों को,
अब तु फ़िर से ना एक रूप दिला।
माना बहुत शौक़ है, तुझे ऊँची उड़ानों को भरने का,
पर सुन, अभी वक़्त नहीं मेरे पास,उन्हें पूरी करने का ।
अब बार बार दलीलें दे कर के,मुझे ना भटका,
कुछ पल के लिये ही सही,
पर समझ
मन मेरे ,अब ठहर जा…।

कुछ सपने है मेरे,
उन्हें करने दे पूरा अभी,
देख ,वक्त नहीं है तेरी इन बेतरकीब नुमाइशो का मेरे पास,
कुछ समय बाद सोचूँगी फिर कभी।
अब इन ख़यालो की जंजीरों में,मुझे फ़िर ना उलझा,
कुछ पल के लिये ही सही,
पर समझ
मन मेरे , अब ठहर जा…. ।

रास्ते को अपने अब एक नई दिशा में मोड़,
बीते पलों में आना जाना ,
अब तो छोड़,
जानती हूं, खोया है कुछ तूने,
तो है बहुत कुछ पाया भी,
किसी ने दिल दुखाया तो
याद रख,
किसी ने है हसाया भी,
देख, अब उन यादों में फ़िर ना मुझे ले जा,
कुछ पल के लिये ही सही, पर समझ
मन मेरे , अब ठहर जा…. ।

By- Aayushi sharma

Post No. THG009

Follow me on Instagram….Click Here

बेइंतेहाँ मोहब्बत.. Click Here for Read

Authors

Leave a Reply

%d bloggers like this: