Hindi Poetry

माँ की परवाह-

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माँ की परवाह-

देखों माँ कितनी परवाह करती है हमारी,
एक हम है कि उनके बताएं काम भी लापरवाही से करते है,
वो माँ जो बीमारी में भी बच्चों के लिए खाना बनाकर परोसती है,
हाथ में सबकों पानी भी देती है,
घर का हर काम और जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाती है,
अपने लालन पालन से बच्चों को बड़ा भी करती है,
और बच्चें अपने माँ बाप का ख़याल भी ठीक से नहीं कर पाते,
लापरवाह होकर कभी अधुरा छोड़ देते है तो कभी पूरा कर देते है,
माँ जब पूछ दे बच्चों से एक ग्लास पानी का,
तब उस बच्चें को मोबाइल छोड़ माँ की आवाज़ सुनना भी आफत नज़र आती है,
समय के साथ आज हर कोई लापरवाह होता जा रहा है,
कुछ संशाधन का भी गलत प्रयोग किया जा रहा है,
जो काम हम स्वयं से कर सकते है,
उसके लिए भी कभी न कभी, कहीं न कहीं दूसरों से करवाकर खुद लापरवाह हो जाते हैं ।

@ehsaas_ki_awaaz
✒️Alok Santosh Rathaur

भावना एहसास

फर्ज़

माँ की परवाह-

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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