माँ की ममता हैं मेरा स्वर्ग

रिश्तों का आधार हैं माँ,
और जीवन का एक मात्र सार हैं माँ का प्यार।

फिक्र किस बात की जब माँ का हाथ सर पर हो,
सारी फिक्र भूल जाती हूँ जब माँ के आंचल में समा जाती हूँ।
जितनी फिक्र माँ एक बच्चें की करतीं हैं,
शायद ही कोई कर पाएगा किसी की।
वो बारिशों में छाता लेकर पीछे चलना,
वो रात-रातभर जागकर मरहम-पट्टी करना।
खुद न खाकर हमें खिलाना,
एक छोटी सी चोट पर मेरे रोनें पर फिक्र कर अपनी छाती से लगा लेना।
सचमुच तुझ जैसी फिक्र कोई नहीं करता माँ,
तू खुद की फिक्र छोड़ हमें बनिती हैं।
पढा़-लिखाकर हमें सक्षम बनाती हैं,
तभी तो हर बच्चा अपनी माँ से लिपटकर हर फिक्र भूल जाता हैं।
तेरी इस फिक्र में मैं अपनी परेशानी भी भूल जाती हूँ,
भूल जातीं हूँ के कोई परेशानी भी थी मुझे।
अपनी माँ के आंचल में मैं अपनी सारी परेशानी भूल जाती हूँ,
मेरी हर फिक्र का जवाब हैं मेरी माँ के पास।
माँ के आशीर्वाद से,
वक़्त तो क्या, किसमत भी बदल जाती हैं।
माँ तुम्हारे होने से ही मैं हूँ,
तुम्हारे बिना मैं कुछ भी नहीँ।
माँ तुमने जब मुझे छुआ,
तो मैं अपनी सारी परेशानी भूल गई।
अगर तुम ना होतें,
तो शायद में नहीं होती।
तुम तुम हो,
इसलिए में मैं हूँ।
यूँ तो दिखावा पसंद नहीं तुमहें,
मगर अगर हमें कामयाबी मिले तो पूरे विश्व में ही नहीं ईश्वर को भी इसका पता लग जाता हैं।
कहते हैं शमशान में अक्सर रिश्ते खत्म हो जाते हैं,
मगर तुम्हारा-हमारा रिश्ता तो अमर हैं।
ईश्वर को भी तुम्हारी ममता पाने के लिए अवतरित होना पड़ा,
तो ये मनुष्य तो कितना भाग्यशाली हैं कि उसके पास माँ हैं।
लोग कहते हैं कि पिता के नाम के बिना तुम कुछ भी नहीं,
मगर कोई ये कयों नहीं कहता की हमें जन्म देने वाली माँ के बिना हम असतीतवहीन हैं।
यूँ तो जिंदगी में बहुत कुछ मिल ही जाता हैं,
मगर एक बार गई हुई माँ कभी लौट कर नहीं आती।
यूँ तो जितना भी लिखूँ कम ही हैं,
मगर इतनी सी गुजारिश आज उस ईश्वर से हैं,
चाहे मेरी पूरी दुनिया ही क्यों न उजड़ जाए,
चाहे मौत ही क्यों न आ जाएं।
चाहे तू भी मुझसे रूठ जाएं,
पर बस इतना करना की मेरा और मेरी माँ का साथ ना छुटने पाएं।
हर मुसीबत का हल हैं मेरी माँ का प्यार,
हर मुसीबत का हल हैं मेरी माँ की ममता का आंचल।
हर आत्मा की कुछ इच्छाएँ होती हैं,
और मेरी इच्छा केवल आपकी खुशी थी।
हाँ ऐसी आत्माएं मौजूद हैं,
हमारी माँ की आत्मा।
पवित्रता, प्रेम और त्याग की सच्चाई,
मुझे बस मेरी माँ के द्वारा ही पता चला हैं।
प्रेम का निवास,
मेरी माँ की गोद में एक मीठी नींद।
मैंने जबसे अपनी माँ को पाया हैं,
मैंने धरती पर ही स्वर्ग पाया है।
जन्म से लेकर मृत्यु तक,
माँ जीवन का सच्चा प्यार!वह प्यार का प्रतीक है,
एक और केवल मेरे जीवन का प्यार।
वो मेरी माँ है,
मुझे उस पर गर्व है।
वह केवल अपनी तरह की एक है,
अद्भुत, अविरल, असामान्य, असाधारण।
कुछ भी नहीं तो तुलना की जा सकती है,
और न ही समायोजित की जा सकती है।
वह प्यार की अताह धारा है,
हर किसी का पहला और हमेशा के लिए जीवन भर का प्यार हैं।
माँ शांति हैं,
माँ आस हैं।
माँ सांस हैं,
माँ ही विश्वास हैं।
हिमालय से गंगा तक,
पवित्रता का प्रतीक है मेरी माँ।

मेरे लिए मेरे हर रिश्तें का आधार हैं मेरी माँ,
और हर रिश्तें की अनोखी सच्चाई हैं मेरी माँ का प्यार।
मेरे लिए धरती पर स्वर्ग हैं,
मेरी माँ का दुलार।

©दीपशिखा अग्रवाल।

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