MINE MOTHER

माँ, मैं और माँ

यूँ कि माँ पर कुछ बोलने के लिए तो अभी छोटा हूँ
पर माँ कहती है कि मैं सिक्का उसका खोटा हूँ
माँ पर कुछ टिप्पणी करूँ इतना अल्पज्ञ नहीं हूँ
पर माँ के लिए कुछ ना बोलू इतना मर्मज्ञ नहीं हूँ

तो चलो आज एक दूजे से कुछ राज कहते हैं
बात जब माँ की है तो जनाब चुप क्यूँ रहते हैं

अब माँ तो महान है समता और संतुष्टि का ज्ञान है
माँ के बिना ये घर वीरान लगता है
कोई जश्न तो जैसे कोहराम लगता है
माँ!!! माँ तो प्यार का सागर है
कह दूँ तो ममत्व का गागर है

वो हँसमुख है, भोली है, वो करुणानिधान है
संसार की सभी आभाओं का अनुपम सम्मान है
वो कभी सीता,पार्वती, मीरा, शबरी, राधा रानी है
तो कभी पद्मिनी, हाड़ा, टेरेसा और लक्ष्मीबाई महारानी है

उसके तो हर शौर्य की बात ही निराली है
इतिहास जो देखू तो उसकी कई कहानी है
अरे ये तो इतिहासों मे भी अमर रह गयी है
और बाहुबली की तलवार भी तो यहीं झुक गयी है

चोट ग़र मुझे लगे तो रोती है वो
दर्द जो मुझे हो तो सहती है वो
पर शायद हम अपनी जिम्मेदारियां भूल जाते हैं
जरा उम्र क्या ढ़ली उसे वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं
ख़ैर ये तो बहुत ही शर्मनाक है
अरे बेग़ैरत वही तो तेरी ‘नाक’ है

जिसकी गोद मे सर रखने मात्र से सारी थकान मिट जाती है
जिसके कंगन की आवाज से हर दीवार झंकृत हो जाती है
वही तो समस्त प्रतिभाओं की धनी माँ अंबे की वरदायी है
माँ के रूप में वो साक्षात देवी का रूप धर आयी है

इस महान विरली आभा को मैं अभिवादित करता हूँ
नियमित इसके चरणों मे ये शीश नवादित करता हूँ

अरे इसके सामने तो वो देवता भी मौन हैं
इसे क्रोध आए तो बोलता ही कौन है
ये अटल है, अचल है, अविवादित है
ये माँ है साहब, मेरे घर का आदर है

माँ पर लिखते हुए शब्द बड़ी मुश्किल से चुन पा रहा हूँ
सोच रहा हूँ क्या सच में इस शब्द में रंग भर पा रहा हूँ??
तो अब इस बात का भी मैं परीक्षित बन गया हूँ
पर शायद मैं इसमे भी कहीं असफल नजर आ रहा हूँ

माँ पर मैं क्या लिखूँ साहब मेरी हैसियत क्या है
बस इतना बता दे माँ तेरी ख़बर-ए-खैरियत क्या है
तू खुश है, तंदरुस्त ये हमेशा जताती है
चाहे कितना भी दुख हो हमेशा छुपाती है
पर मैं तो तेरा ही बेटा हूँ माँ मैं जान जाता हूँ
तेरी हसीं के पीछे छिपे दर्द को पहचान जाता हूँ

इस बार कोशिश की है थोड़ा नाम कमाने की
तेरे दिए हाथों से तेरा संसार सजाने की
तू चिंता मत करना माँ क़ामयाब होके लौटूंगा
तू बस आशीर्वाद दे मैं नायाब होके लौटूंगा

अब बस इतना कहके तुझसे विदा लेता हूँ
हाँ याद आती है तेरी पर अब रो लेता हूँ

और हाँ माँ अब तेरी बात मान ली है मैंने
वो आयशा!” उसकी सच्चाई जान ली है मैंने
फ़िर तोड़ दी है कलम और फाड़ दी है डायरी
कोई सुनता ही नहीं तो क्या सुनाऊँ शायरी

बस यही कुछ राज़ हैं जिन्हें आज फ़िर कहता हूँ
माँ कहती है कि मैं उसका खोटा सिक्का हूँ…….

✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

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