मंज़िल ए जुस्तजू में भटकता रहा,
मंजिल तो यहां थी।
आज फिर अकेला था,
मां तुम कहां थीं।।
मेरे दुखों का सबेरा तुम,
मेरे तबस्सुम का बसेरा तुम,
अगर गिरा मैं तर्स से तो मेरे नदीम तुम,
मेरी फ़क्र में करीम तुम,
मेरी फ़िक्र में रहीम तुम,
फ़ज़ल हो तुम,
मुझमें सजल हो तुम,
तुम्हारे बिन सारी उम्मीद तजां थीं।
आज फिर अकेला था,
मां तुम कहां थीं।।

By: Yogesh sharma
 

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