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मृत्यु

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“जीवन एक मिथ्या है,मृत्यु ही सार्वभौमिक सत्य”

एक पंक्ति में जीवन का सार समाहित है।ये मान-सम्मान,धन-दौलत,रिश्ते-नाते एवं जीवन के तमाम ऐश-औ-आराम निरर्थक है।एक पेट के लिए आरम्भ हुआ सफ़र,शौहरत,नाम एवं आकाश की अनन्त उँचाईयों को छूने के खेल से होता हुआ,क्षणभंगुर शरीर,उस अटल सत्य को सिद्ध करता है,उसमें ही अपना अस्तित्व खोकर।मृत्यु ये सुनिश्चित करती है कि जब तुम्हें एक दिन मुझमें मिलना ही है तो व्यर्थ की चिन्ता क्यूँ।ये सासांरिक खुशीयाँ,भोग-विलास,मात्र मिथ्या के कुछ नहीं।

दो आत्माओं का मिलन न केवल आत्माओं का मिलन बल्कि दो तन का भी मिलन होता है,जिनके हृदय में प्रस्फुटित हुआ था कभी प्रेम,जो अपने शीर्ष पर है।जो उत्पन्न करता है अपने प्रेम का नया प्रतीक,जो आगे बढ़कर उसी कर्म का अनुकरण करता है।जीवन के उसी सत्य को वो भी चरितार्थ करता है,और यहाँ तक कि इस मृत्युलोक का प्रत्येक प्राणी उस सत्य की न चाहते हुए भी अवहेलना नहीं कर सकता।

एक सफ़र को तय करने के बाद,वो चला जाता है और छोड़ जाता है अपनी अनेकानेक बातें,यादें,अफ़साने,कहानीयाँ और अमिट स्मृतियाँ जो आने वाली तमाम पीढ़ीयों के मानस पटल पर सदीयों-सदीयों तक छायी रहती है।वो अपनी मंज़िल को प्राप्त कर अपने सफ़र का अन्त लिख जाता है,एक राह के रूप में।जिसे उसकी नयी पीढ़ी पढ़ती है एवं सबक लेती है।उसके कहे शब्दों को वो ज़हन में बसाये,चरितार्थ करने की कोशिश करता रहता है।

“मृत्यु के पास सभी प्राणीयों की एक वसीहत है,जिस पर सभी अपने अमिट दस्तख़त लगाकर आते है।जिसमें उसे अधिकार है कि वो जब चाहे,जैसे चाहे और जहाँँ चाहे,उनकी साँसों को उनसे जुदा कर सकती है।ये उसमें स्वछंद शब्दों में उँल्लेख़ित है।”

सच ही कहा है किसी ने कि मिट्टी का तन एक दिन मिट्टी में ही मिल जायेगा।पल दो पल की है ज़िन्दगी की ये कहानी।ये एक अफ़साना है।तो जब एक दिन जाना ही है सभी को,तो

“क्यूँ हम ईर्श्या-द्वेष भावना रखे,जब रखने को प्रेम है।
क्यूँ रखे हम बैर किसी से,जब मित्रता का खूबसूरत रिश्ता पड़ा है।
क्यूँ रहे हताश,जब तय करने को एक सफ़र पड़ा है
क्यूँ रहे हम मृत्यु से उदास,जब सामने एक जीवन खड़ा है।”

तो दोस्तों!मेरे साथीयों!प्यारे भाईयों!
मिलते रहों,हँसते-मुस्कराते रहों,दो पल की है ज़िन्दगी,
न जाने कौन-सी रात आख़िरी हो,न जाने कौन सी बात आख़री हो,मुलाक़ात आखिरी हो।

@ujjvaLshukla

 

शब्दो का माइना माँ,

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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