Hindi Poetry

मज़बूरी

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मज़बूरी उस पिता की आँखों में दिखाई देती हैं,
जो अपनी बेटी के दहेज के लिये अपनी ज़मीन बेच देता है ।

मजबूरी उस गरीब माँ की आंखों में दिखाई देती है,
जो अपने हिस्से की रोटी भी अपने बच्चों को खिला देती है ।

मजबूरी उस लड़की की आँखों में दिखाई देती है,
जो अपने माँ बाप की इज्जत के लिये अपने प्रेमी को छोड़ देती है।

मजबूरी उन जरूरतमंदो की आँखों में दिखाई देती है,
जब वो सर्द रातों में बिना रजाई के काँपते रहते है ।

मज़बूरी उस वीरवधु की आँखों में दिखाई देती है,
जिसका पति सरहद पर पहरा दे रहा होता हैं ।

मज़बूरी उन वृद्ध माता पिता की आँखों मे दिखाई देती है,
जिनके बच्चे उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ जाते है ।

मज़बूरी उन पंछियों की आँखों में दिखाई देती है,
जो पिंजरे में क़ैद आसमान को निहारते है।

-aayushiee

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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