Memories

यादें

नींद न मेरी आँखों में हैं न तुम्हारी आँखों में,
फ़र्क बस इतना है कि
मेरी आँखें ढूंढती हैं तुमको और तुम चंद अल्फ़ाज़ों में निकल गए।
इन अंधियारी रातों में घूम रहा हूं तुमको ढूंढते,
और जब पहुँचे तुम्हारी चौखट पर
न जाने क्या हुआ कि हम फिसल गए।।
दरवाज़े तो खैर बंद थे तेरे घर के,
मगर तेरी इश्तियाक़ में हम ख़ुद के घर से निकल गए।।
मेरी आँखें ढूंढती हैं तुमको और तुम चंद अल्फ़ाज़ों में निकल गए।।

 

Written By- Yogesh Sharma

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