याद है

याद है वो सावन की बारिश वो सपनों का पानी
वो चाहत की बातें वो ख्वाहिश की रानी
तेरे आने की आहट चले जाने की नादानी
वो प्यारी सी सूरत और फ़ूलों की बानी

वो क्या है कि ख़्वाब तो यूँ ही सजाए जाते हैं
फ़िर यूं ही तो ज़मीं मे मिलाए जाते हैं
आखिर तुमने भी तो ज़माने का रंग दिखाया था
फ़ूलों के बगीचों को यूँ ही नहीं सजाया था
खैर मस अला अब गैर हो गया है
और फ़िर ज़माने से भी तो बैर हो गया है
अरे सुनो ना कुछ कहना है तुम से
यही कि अब ख़फ़ा रहना है तुमसे
यादों का तो हर पल निराला है
कोई तो धरती का “अम्बर” है
तो कोई सूरज का “सितारा” है

फ़िर वही मिलने की बातें वो बातें ना मानी
वो सावन की बारिश वो सपनों का पानी…

ख़ैर जाने भी दो चलो कुछ बात और करते हैं
अब तुम तो माने नहीं तो कहीं और रुख़ करते हैं
अब उन यादों से बहुत दूर जा रहा हूँ मैं
तुझसे दूर जाके तेरे करीब आ रहा हूँ मैं
ये कमबख़्त यादें भी तो बाज़ नहीं आती
एक बार याद आजाये तो भुलायी नहीं जाती
अब इनसे भी रोज़ का काफिराना है
जो भी हो अब बस यही तो नज़राना है
वैसे तुझे बता दूँ कि तुझसे बहुत आगे बढ़ गया हूँ मैं
जाने अनजाने में बहुत ग़लतियाँ कर गया हूँ मैं
अब तो खुद से भी कुछ आस नहीं है
मुझे तो याद है पर तुझे अब याद नहीं है

तो अब मैंने भी भुला दिए हैं ग़म सारे
याद नहीं रखता अब लगा लिए हैं मरहम सारे

अब फिर से वही यादों की गंगा और अश्रु का पानी
वो चाहत की बातें वो ख्वाहिश की रानी…….

✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

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