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रोसोडें में कौन हैं

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रोसोडें में कौन हैं
वहीं मेरे हाथों की हल्दी हैं
जो अरमानों से सजाई आई हैं

वहीं मेरे आंखो में झोंकी मिर्च हैं
जो वक़्त के साथ तपी लाल रंग से रंगी मांग में सिंदूर से सजाई आई हैं

वहीं मेरे आंखो में आंसुओ की नमी नमक हैं
जो नज़रंदाज़ कर नज़र उतारी हर घर हर उम्र की लाज बचाती आई हैं

वहीं काली स्याही से गहरे ज़ख्मों की काली मिर्च हैं
जो तीखे सवालों मतभेदों को संतुलन बनाती आई हैं

वहीं गरम ख़ून सी ज़िन्दगी गरम मसाला हैं
जो रिश्तों में माहौल में ढलने को स्वाद बढ़ाती आई हैं

वहीं गरमाईश ,हर पल की, हर घर की, हर रिश्तों की, हर बात की मर्यादा की, हर दिल में प्रेम की,
हर विश्ववास की, हर अपनेपन कि
वहीं तपिश होती स्नेह की कोशिश करती सिद्धांतो की
परिवार की इज़्ज़त की , सम्मान की , बदलाव की, लगाव की
वहीं तपिश होती स्नेह हर बेटी की कहानी ये है
सदियों पुरानी, सर का ताज , मां बाबा का नाज़ रसोड़े का दरवाज़ा दिखा कर घर का सम्मान एक अर्धांगिनी का नाम ,

नौकरानी का दर्ज़ा , काम वाली बाई का ख़र्च, घर के सबका ख्याल नर्स का ख़र्च, क्या क्या नहीं करती
मांग सिर्फ़ प्यार और इज़्ज़त ही की करती,
बदले क्या पाती रसोड़े में ही ख़ुद को फिर झोंक आती
क्या बदलाव क्या नज़रिया क्या सिखाती क्या बताती
फिर सुबह की चाय फिर शाम की चाय फिर घर का सम्मान
फिर ख़ुद का स्वाभिमान को ठेस पहुंचाती रसोड़े में खड़ा पाती।

रोसोडें में कौन हैं

©️ जज़्बात ए हर्षिता

 

Entry No. THG009

Date: 20th Oct 2020

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